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Sunday, 1 January 2017
Wednesday, 26 October 2016
राजस्थान की गोशाला में गायों के लिए एयर कूलिंग सिस्टम
जयपुर। राजस्थान के झुंझुनूं में 117 साल पुरानी एक गोशाला अपने आप में अनूठी है। देश की यह पहली ऐसी गोशाला है जहां गायों के नहाने के लिए शॉवर स्ट्रीट (फव्वारा सिस्टम) लगाया गया है। इसके एक छोर में गाय घुसती हैं और नहाती हुई दूसरी तरफ निकल जाती हैं। यहां दिनभर भजनों की धुन बजती रहती हैं। गायों के रहने के स्थान पक्के हैं। दिन में दो बार प्रेशरयुक्त पानी से इनकी सफाई होती है।
गायों को गर्मी से बचाने के लिए गोशाला में सेंट्रलाइज कूलिंग सिस्टम लगा हुआ है। 80 सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। देश की किसी भी कोने में बैठकर वेबसाइट के जरिये गोशाला की गतिविधियां ऑनलाइन देखी जा सकती हैं। यहां पूजा अर्चना के लिए नंदी पूजा गृह एवं गोशाला परिक्रमा स्थल भी बने हुए हैं।
गोशाला में वर्तमान में करीब 1000 गाय हैं। इनमें से 160 गाय दूध देती हैं। इनसे गोशाला को वार्षिक सवा करोड़ रुपए की आय होती है। झुंझुनूं के व्यापारी अपनी कमाई का 25 फीसदी गोशाला को देते हैं। इनसे सालाना 40 लाख रुपए मिल जाते हैं।
गोशाला प्रबंधन कमेटी के सचिव सुभाष क्यामसरिया के मुताबिक गोशाला में गायों के अंतिम संस्कार के लिए विद्युत चलित मशीन लगाने की योजना है। बारिश का पानी एकत्रित करने के लिए पांच लाख लीटर क्षमता का वॉटर टैंक बनाया जाएगा। सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की भी योजना है। गोशाला को पर्यटन विभाग से जोड़ने के लिए भी प्रयास किए जा रहे है।
गायों को गर्मी से बचाने के लिए गोशाला में सेंट्रलाइज कूलिंग सिस्टम लगा हुआ है। 80 सीसीटीवी कैमरे भी लगे हैं। देश की किसी भी कोने में बैठकर वेबसाइट के जरिये गोशाला की गतिविधियां ऑनलाइन देखी जा सकती हैं। यहां पूजा अर्चना के लिए नंदी पूजा गृह एवं गोशाला परिक्रमा स्थल भी बने हुए हैं।
गोशाला में वर्तमान में करीब 1000 गाय हैं। इनमें से 160 गाय दूध देती हैं। इनसे गोशाला को वार्षिक सवा करोड़ रुपए की आय होती है। झुंझुनूं के व्यापारी अपनी कमाई का 25 फीसदी गोशाला को देते हैं। इनसे सालाना 40 लाख रुपए मिल जाते हैं।
गोशाला प्रबंधन कमेटी के सचिव सुभाष क्यामसरिया के मुताबिक गोशाला में गायों के अंतिम संस्कार के लिए विद्युत चलित मशीन लगाने की योजना है। बारिश का पानी एकत्रित करने के लिए पांच लाख लीटर क्षमता का वॉटर टैंक बनाया जाएगा। सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की भी योजना है। गोशाला को पर्यटन विभाग से जोड़ने के लिए भी प्रयास किए जा रहे है।
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